मनोरंजन

ग़ज़ल – अनिरुद्ध कुमार

दिल पूछे बता दिलदार कहाँ,

जो लाये खुशी वो प्यार कहाँ।

 

यह  जीना लगे  अनुबंध नया,

बातों में  मृदुल  झंकार कहाँ।

 

जज्बाती लहर झकझोर रहें,

नयनों में नवल श्रृंगार कहाँ।

 

जो वादा किये वो भूल गयें,

मन मोहे सदा संसार कहाँ।

 

मंजिल का पता किससे पूछें,

मझधारे खड़ें पतवार कहाँ।

 

लहरों से कहें चल राह दिखा,

वो खुद में मगन किरदार कहाँ।

 

सपने भी कहाँ संवाद करें,

उठती हैं लहर पर धार कहाँ।

 

वीराना लगे क्या बात करें,

ये खुशियां कहें दरकार कहाँ।

 

‘अनि’ जीता यहाँ बिन साथी के,

कोई तो बता दो यार कहाँ।

– अनिरुद्ध कुमार सिंह

धनबाद, झारखंड

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