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गजल – ऋतु गुलाटी

यार को भी अब खबर होने लगी,

प्यार में हँसकर बसर होने लगी।

 

प्यास दिल की आज तो बढने लगी,

ख्वाहिशे अब तो समन्दर होने लगी।

 

जिंदगी मे सब हुआ हासिल कहाँ,

बेवजह चर्चा नगर होने लगी।

 

यार की नजरें कही जाकर ठहर,

अब दुआ भी बेअसर होने लगी।

 

यार के पहलू मे बिती अब तो शबा,

दिन गुजारे अब उमर होने लगी।

 

अब मिली नजरें सनम से बोलती,

राज दिल का वो नजर होने लगी।

 

लाजमी था बात दिल की हम कहे,

अब शिकायत भी असर होने लगी।

– ऋतु  गुलाटी  ऋतंभरा, चण्डीगढ़

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