मनोरंजन

कविता – रोहित आनन्द

कोशिश तो करो,

जरा कोशिश तो करो तुम।।

 

क्या तुम्हें यह भी नहीं पता है,

कोशिश करने वालों की,

कभी हार नहीं होती,

ओ कभी हार नहीं होती।।

कोशिश तो करो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 

कोशिश करना है तो दिमाग लगाके करो,

दिमाग लगाके करो – ऐ दिमाग लगाके करो।।

जब भी कोशिश करो तो,

मेट्रो मैन श्रीधरन और ,

इ.एन.एस मीडिया प्रबंध विकास तोमर के जैसे करो।

कोशिश तो करो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 

अरे कोशिश तुम क्यों नहीं करते हो,

क्यों नहीं क्यों नहीं तुम कोशिश करते हो।।

वो कोशिश चाहे किसी भी काम का हो,

क्योंकि कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता है,

बस तुम कोशिश करते जाओ।

कोशिश तो करो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 

कोशिश करो रे भाई कोशिश करो,

अगर कोशिश ही नहीं करोगे,

तो तुम समझ लो कि तुम,

इस दुनिया के लायक ही नहीं हो।

कोशिश तो करो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 

थोड़ा सा किसी के आगे झुकने में क्या जाता है?

क्या जाता है-क्या जाता है??

कोशिश तो करो,

बस तुम कोशिश करते जाओ।

कोशिश तो करो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

– रोहित आनंद, बांका, बिहार, मेहरपुर

फोन नंबर – 9334720170

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