मनोरंजन

दोहा – अनिरुद्ध कुमार

छोटी सी यह जिंदगी, दूर लगे है गाँव।

लम्बे टेढ़े रास्ते,  थक जाते है पाँव।।

 

डेग बढ़ाते जा रहें, हर मौसम बदलाव।

आँधी,पानी से लड़ें, धूप या कहीं छाँव।।

 

अभिलाषा मन में उठे, पाते शीतल ठांव।

व्याकुलता परवान पर, रह रह के भटकाव।।

 

जीवन अपने रंग में, तरह तरह के भाव।

मनमानी अपनी करें, देखे हरदम दाव।।

 

जाना है सब जानते, अजबे-गजबे चाव।

मन बैरागी नभ उड़े, कोई नहीं लगाव।।

– अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड

Related posts

हर हर महादेव – भूपेन्द्र राघव

newsadmin

ज़ख्म कभी भरता नहीं – प्रियदर्शिनी पुष्पा

newsadmin

माँ महागौरी भक्ति देना – कालिका प्रसाद

newsadmin

Leave a Comment