मनोरंजन

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

मर रहा सड़क पर अजी आदमी,

क्यो किसी को बचाता नही आदमी।

 

वो तो वादे भले रात दिन अब करे,

वक्त पे काम आया नही आदमी।

 

लोग सुनते रहे हैं भले अब ग़ज़ल,

अब च़ल़ऩ मे है गाते त़ऱह़ी आदमी।

 

ऩफ़ऱत़े आज फैली जहां देख़ लो,

आ भुल़ा दे ये ऩफ़ऱत सभी आदमी।

 

जब़ ब़ह़ाऱे खिल़ी,खिल उठा है च़म़न,

ग़ीत़ खुशियों के गाते तभी आदमी।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़

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