( 1 ) स्वयं बदलो
बदलेगी दुनिया,
आओ, महकालें मन की बगिया !!
( 2 ) बदलो अपनी
स्वयं की चाल,
छोड़ो करना, औरों का ख्याल !!
( 3 ) बदलेगी अगर
हमारी मनोदशाएं,
दिखलाई देंगी, तभी हमें दिशाएं !!
( 4 ) दुनिया हमारी
खिलती चलेगी,
जब स्वयं की, तकदीर बदलेगी !!
( 5 ) हम सुधरेंगे
युग सुधरेगा,
तन मन जीवन, सारा बदलेगा !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान