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महावीर जयंती स्तुति – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

वीर तपस्वी प्रभु महावीर, सत्य का दीप जलाते रहे।

अहिंसा की अमर वाणी, जग को राह दिखाते रहे।

 

त्याग तपस्या का उजियारा, जीवन में भरते रहे।

ममता मोह के बंधन तोड़ आत्मदीप जगाते रहे।

 

शांत मुख पर तेज अनोखा, करुणा सागर लहराता।

हर प्राणी में एक समान, प्रेम संदेश सुनाता।

 

क्रोध लोभ सब दूर भगाकर, क्षमा पथ अपनाया।

सत्य अहिंसा के संग मिलकर, जग को धर्म सिखाया।

 

कठिन साधना की उस राह पर, दृढ़ता से बढ़ते गए।

काँटों भरे हर पथ को भी, फूलों सा करते गए।

 

नंगे पाँव धरा पर चलकर, मानवता को सींचा।

स्वार्थ रहित उस जीवन,जग का अंधकार खींचा।

 

वाणी में मधुरता ऐसी, जैसे सरिता बहती हो।

दृष्टि में शीतलता ऐसी, जैसे चाँदनी रहती हो।

 

जीवन का सच्चा अर्थ बताया, आत्मा का विस्तार।

मौन तपस्या में छिपा हुआ,जग का सारा सार।

महावीर जयंती का पर्व,श्रद्धा से हम मनाएँ।

 

उनके आदर्शों को अपनाकर, जीवन सफल बनाएँ।

सत्य अहिंसा का दीप जलाकर, हर दिल में उजियारा।

 

प्रभु महावीर की वंदना, बने जगत का सहारा।

 

-राजलक्ष्मी श्रीवास्तव, जगदलपुरराजिम,छत्तीसगढ़

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