( 1 ) राम राम राम
राम ही राम !
हैं जन मन के राम.,
बसें राम हमारे मन आत्माराम !!
( 2 ) हैं राम सहज
राम ही तप !
हैं राम भाई पिता अनुज.,
राम से बड़ा न कोई जप !!
( 3 ) हैं राह राम
राम ही छाँव !
सदा हनुमदाश्रय राम.,
हैं सर्वपुण्याधिकफलप्रद राम !!
( 4 ) राम मुनिसत्तम
परमपुरुष राम महापुरुष !
हैं राम महासार पुण्योदय.,
परात्पर पर पारग परेश !!
( 5 ) राम सर्वभूतात्मक
शिव रामचन्द्र परमात्मा !
राम परं ज्योति परं धाम.,
सच्चिदानन्दविग्रह पुराणपुरुषोत्तम राम !!
-सुनीलानंद, जयपुर, राजस्थान |