मनोरंजन

गीत- जसवीर सिंह हलधर

नगपति खुद जिसका मुकुट बना,

सागर जिसके पग धोता है !

भारत जैसा घर हम सब का ,

नसरू भैया क्यों रोता है !!

 

मंदिर मस्जिद औ गुरुद्वारे,

देखो लगते कितने प्यारे !

मीठे दाने खारे मोती ,

है रंग सभी न्यारे न्यारे !!

भाषा कड़वी भाषण मीठा ,

बेमतलव आपा खोता है !

नसरू भैया क्यों रोता है !!1

 

कहता है घर में डर लगता ,

क्यों भोली जनता को ठगता ।

उससे कुछ बोला है तूने ,

जो पत्थर ले पीछे भगता !!

सेना से  तेरा नाता है ,

या आतंकी ही पोता है !

नसरू भैया क्यों रोता है !!2

 

जब भी भारत में विपद पड़ी ,

मोमिन की छाती वही अड़ी !

भूला तू बाबा कलाम को ,

गीता के संग कुरान पढ़ी !!

पद की मर्यादा मत तोड़े ,

यह गृह युद्ध को नियोता है !

नसरू भैया क्यों रोता है !!3

 

अकबर सेना में मान लड़े ,

राणा सेना में खान लड़े !

ये रिस्ता बहुत पुराना है,

हलधर” टूटे ना खड़े खड़े !!

इतिहास झाँक ले थोड़ा सा ,

क्यों बीज गरल का बोता है !

नसरू भैया क्यों रोता है !!4

– जसवीर सिंह हलधर, देहरादून

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