मनोरंजन

मेरी कलम से – डा० क्षमा कौशिक

मां शारदे को नमन कर रही हूं,

अक्षर सुमन अर्पण कर रही हूं,

मन मानिकों को लय में पिरोकर,

प्रातः नमन वंदना कर रही हूं।

<>

दुंदुभी बज उठी गगन में बरखा झम झम बरस रही,

चपला छिपी हुई उर घन में, नर्तन करने को उमग रही,

क्या उमंग धरती अम्बर में गणतंत्र दिवस के वंदन  को,

स्नात पूत  हो गई वसुधा, अंबर  मचला अभिनंदन  को।

–  डा० क्षमा कौशिक, देहरादून , उत्तराखंड

Related posts

मकस कहानिका द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कवि सम्मेलन का किया आयोजन

newsadmin

फिराक गोरखपुरी की जयंती पर काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

newsadmin

तू पसंद है मुझको – गुरुदीन वर्मा

newsadmin

Leave a Comment